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Uttarakhand में फिर प्रकृति का कहर: बादल फटने से बाढ़ जैसे हालात

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Cloudburst in Uttarakhand triggers flood-like situation in several areas.

Uttarakhand के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में 5 अगस्त 2025 को अचानक बादल फटने से बहुत बड़ा हादसा हो गया। खीरगंगा नदी में तेज बाढ़ आ गई, जिससे गांव में पानी और मलबा घुस गया। कई घर, दुकानें और होटल पूरी तरह बर्बाद हो गए।

अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 100 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। बहुत से मजदूर मलबे के नीचे दबे होने की आशंका है। गांव के बाजार और सड़कें मलबे से भर गई हैं।

राज्य सरकार ने राहत और बचाव के लिए NDRF, SDRF और सेना की टीमें भेजी हैं। हेलिकॉप्टर की मदद से भी बचाव कार्य चल रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार हालात पर नजर रख रहे हैं।

मौसम विभाग ने 10 अगस्त तक पूरे उत्तराखंड में भारी बारिश की चेतावनी दी है। प्रशासन ने लोगों से पहाड़ी इलाकों और नदियों से दूर रहने की अपील की है।

Uttarakhand hit by cloudburst, houses and roads affected by floods.

 

बाढ़ ने मचाई तबाही: धराली गांव खतरे में

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में 5 अगस्त 2025 को बड़ा हादसा हुआ। खीरगंगा इलाके में बादल फटने से भारी बाढ़ आ गई, जिससे गांव में भारी तबाही मच गई।

इस बाढ़ में 4 लोगों की जान चली गई और कई लोग मलबे में दबे होने की आशंका है। धराली बाजार पूरी तरह नष्ट हो गया है। पानी और मलबा कई होटलों और दुकानों में घुस गया है। लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे। कई घर भी बाढ़ की चपेट में आ गए।

राहत और बचाव के लिए सेना, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंची हैं। हेलिकॉप्टर से भी मदद भेजी जा रही है ताकि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।

इधर, मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 10 अगस्त तक भारी बारिश हो सकती है। खासकर पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश की संभावना है। इसलिए देहरादून, टिहरी, पौड़ी और हरिद्वार जैसे जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर दुख जताया और कहा कि सरकार राहत और बचाव कार्यों पर पूरा ध्यान दे रही है।

मुख्यमंत्री धामी की प्रतिक्रिया और राहत कार्य

उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में बादल फटने की घटना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि इस आपदा में जान और माल का बड़ा नुकसान हुआ है, और राज्य सरकार पूरी तरह से प्रभावित लोगों की मदद में जुटी हुई है।

मुख्यमंत्री धामी ने तुरंत एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस और सेना की टीमों को राहत और बचाव कार्य में लगाने के निर्देश दिए। कई टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और लोगों को मलबे से निकालने, सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने का काम कर रही हैं।

सरकार ने केंद्र सरकार से मदद के तौर पर दो एमआई हेलिकॉप्टर और एक चिनूक हेलिकॉप्टर की मांग की है, ताकि दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों में भी राहत सामग्री पहुंचाई जा सके और फंसे लोगों को निकाला जा सके।

मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखा है और राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है और सरकार हर प्रभावित परिवार को हर संभव सहायता देगी।

उन्होंने जनता से अपील की कि वे खराब मौसम में सतर्क रहें, अफवाहों से बचें और प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें।

स्कूल बंद, यमुनोत्री हाईवे पर असर

उत्तराखंड में भारी बारिश लगातार जारी है। इससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने देहरादून, पौड़ी, टिहरी और हरिद्वार जिलों में स्कूलों को बंद रखने का फैसला किया है। बच्चों और अभिभावकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

बारिश की वजह से यमुनोत्री हाईवे पर भी बड़ा असर पड़ा है। स्यानाचट्टी के पास सड़क का करीब 25 मीटर हिस्सा टूट गया है, जिससे वहां वाहनों की आवाजाही बंद हो गई है। कई जगहों पर पहाड़ियों से पत्थर और मलबा गिरने से रास्ते बंद हो गए हैं।

प्रशासन और एनएच (राष्ट्रीय राजमार्ग) विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं और रास्ता खोलने की कोशिश की जा रही है। लेकिन लगातार बारिश के कारण काम में मुश्किलें आ रही हैं। फिलहाल हल्के वाहनों को निकालने के लिए वैकल्पिक रास्ते बनाए जा रहे हैं।

मौसम विभाग ने बताया है कि 10 अगस्त तक भारी बारिश होने की संभावना है। खासतौर पर पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश हो सकती है। इसलिए लोगों को सावधानी बरतने और जरूरी न हो तो यात्रा न करने की सलाह दी गई है।

भविष्य के लिए एहतियाती कदम

उत्तरकाशी में बादल फटने और भारी बारिश से हुई तबाही ने यह साफ कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पहले से तैयारी बेहद जरूरी है। इस तरह की घटनाएं भविष्य में भी हो सकती हैं, इसलिए सरकार और जनता दोनों को मिलकर सतर्कता बरतनी होगी।

क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

सुरक्षित निर्माण                                                                                                                पहाड़ी इलाकों में घर, होटल या दुकान बनाते समय इंजीनियरों और विशेषज्ञों से सलाह लेकर ही निर्माण करें।

अलर्ट सिस्टम मजबूत बनाएं                                                                                                 मौसम विभाग की चेतावनियों को समय पर लोगों तक पहुँचाने के लिए मोबाइल मैसेज, रेडियो और लोकल प्रशासन को   सक्रिय रखें।

आपदा से निपटने की ट्रेनिंग दें
गाँवों और कस्बों में लोगों को सिखाया जाए कि बाढ़ या भूस्खलन जैसी आपदा आने पर उन्हें क्या करना चाहिए।

राहत शिविर पहले से तैयार रखें
हर जोखिम वाले इलाके में पहले से राहत शिविर और सुरक्षित स्थान तय किए जाएं, ताकि लोग समय रहते वहाँ पहुंच सकें।

मजबूत सड़क और पुल बनाएं
सड़कों और पुलों को इस तरह से बनाया जाए कि वे भारी बारिश और भूस्खलन में भी सुरक्षित बने रहें।

जनता को क्या करना चाहिए?

  1. भारी बारिश या चेतावनी के समय यात्रा न करें।
  2. आपातकालीन बैग तैयार रखें, जिसमें जरूरी दवाइयाँ, पानी, टॉर्च और दस्तावेज हों।
  3. प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और अफवाहों पर ध्यान न दें।

इस तरह के एहतियाती कदम उठाकर हम आने वाले समय में नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं। सरकार, प्रशासन और आम नागरिक – सभी की जिम्मेदारी है कि वे सतर्क रहें और तैयार रहें।

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